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लोनिवि मंत्री महाराज ने परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की बैठक में रखे कई सुझाव

उत्तराखंड की नदियों में होगी वैज्ञानिक ड्रेजिंग, बाढ़ सुरक्षा पर केंद्र के साथ बनी संयुक्त कार्ययोजना

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड की प्रमुख नदियों में वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग और बाढ़ सुरक्षा उपायों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मंथन शुरू कर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड की ओर से कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे।

नई दिल्ली के ट्रांसपोर्ट भवन स्थित सागर मंथन हाल में परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में बैठक आयोजित की गई। इसमें व्यास, रावी, भागीरथी, अलकनंदा और तीस्ता समेत प्रमुख नदियों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग तथा बाढ़ से बचाव के लिए राज्यों की संयुक्त कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

बैठक में सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तरकाशी से गंगोत्री के बीच करीब 100 किलोमीटर का क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है। इस क्षेत्र में नदी तल में बड़ी मात्रा में बोल्डर और मलबा जमा होने से नदी का स्तर ऊंचा हो सकता है। कई स्थानों पर नदी में झील जैसी स्थिति बनने की आशंका भी रहती है। ऐसे में नदी किनारे गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग की ऊंचाई बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए।

महाराज ने हर्षिल के निकट बनी कृत्रिम झील का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि राजमार्ग-34 की सुरक्षा के लिए वहां करीब 200 मीटर लंबा बांध बनाया गया है। इसके बावजूद लगभग 600 मीटर हिस्से में सड़क को एक से डेढ़ मीटर तक ऊंचा उठाने की आवश्यकता है, ताकि संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति में राजमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रेलवे परियोजनाओं में सड़क यातायात के लिए स्केप टनल का सुझाव

बैठक के दौरान सतपाल महाराज ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक पत्र भी सौंपा। इसमें उन्होंने उत्तराखंड में प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर, बागेश्वर-कर्णप्रयाग और ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल परियोजनाओं में बनने वाली स्केप टनल को दो लेन मोटर वाहन यातायात के लिए उपयोगी बनाने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि इन टनलों को रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय की संयुक्त सहभागिता से इस तरह विकसित किया जाए, जिससे जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल सड़क यातायात के लिए भी किया जा सके। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा या सड़क बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।

इसके अलावा महाराज ने तिलवाड़ा-मायली-गुप्तकाशी मोटर मार्ग को दो लेन में विकसित कर सुपर मार्ग के रूप में तैयार करने का भी अनुरोध किया।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की। इसमें विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा नदियों में ड्रेजिंग, बाढ़ सुरक्षा और संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

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