Wed. May 13th, 2026

दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्री बैठक

भारत की 2026 की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता के तहत, देश की राजधानी 14-15 मई को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी के लिए तैयार है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया (West Asia) में युद्ध की स्थिति बनी हुई है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गहरी अनिश्चितता है। इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण ईरान के विदेश मंत्री की भागीदारी है, जबकि चीन के विदेश मंत्री की अनुपस्थिति ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

ब्रिक्स@20: वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए एक नया सवेरा

वर्ष 2026 ब्रिक्स समूह की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ है। 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन द्वारा शुरू किया गया यह समूह (दक्षिण अफ्रीका 2010 में शामिल हुआ) अब एक आर्थिक अवधारणा से बढ़कर एक शक्तिशाली भू-राजनीतिक मंच बन चुका है। भारत की चौथी अध्यक्षता “BRICS at 20” के विजन पर केंद्रित है।

इस बार का सम्मेलन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि ब्रिक्स का विस्तार हो चुका है। अब इसमें ईरान, सऊदी अरब, यूएई, इथियोपिया और मिस्र जैसे देश शामिल हैं। यह विस्तार ब्रिक्स को दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक तेल उत्पादन के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधि बनाता है। यह समूह अब पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले G7 जैसे मंचों के विकल्प के रूप में उभर रहा है।

ईरान की भागीदारी: प्रतिबंधों के बीच कूटनीति

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का नई दिल्ली आना इस बैठक का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश है। ईरान वर्तमान में अमेरिका के साथ सैन्य तनाव और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जारी नाकेबंदी ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है, लेकिन ब्रिक्स के मंच पर ईरान की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के साथ समझौता नहीं करेगा।

एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र ने कहा, “ब्रिक्स एक ऐसा अनूठा मंच है जहाँ राष्ट्र पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों की परवाह किए बिना बराबरी के स्तर पर जुड़ सकते हैं। भारत के लिए, एक तरफ अमेरिका के साथ ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को बनाए रखना और दूसरी तरफ ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों और चाबहार बंदरगाह समझौते को आगे बढ़ाना, उसकी संतुलित विदेश नीति का प्रमाण है।”

डॉ. जयशंकर और अराघची के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि भारत पश्चिम एशियाई संकट के शांतिपूर्ण समाधान और अपनी ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

चीन की अनुपस्थिति: एक सोचा-समझा कदम?

चीन के विदेश मंत्री का इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल न होना कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ब्रिक्स की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन की शीर्ष-स्तरीय भागीदारी की कमी को “कैल्कुलेटेड एब्सेंस” (Calculated Absence) के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि आधिकारिक तौर पर अन्य व्यस्तताओं का हवाला दिया जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे भारत-चीन सीमा तनाव और वैश्विक दक्षिण के नेता के रूप में भारत की बढ़ती स्वीकार्यता से जोड़कर देख रहे हैं। इसके बावजूद, भारत इस बैठक को एक अवसर के रूप में देख रहा है जहाँ वह चीन की अनुपस्थिति में भी एक विस्तृत और विविध समूह का नेतृत्व करने की अपनी क्षमता सिद्ध कर सके।

एजेंडा: युद्ध, ऊर्जा और ‘डी-डलराइजेशन’

बैठक के एजेंडे में पश्चिम एशिया का संकट सर्वोपरि है। रूस, ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे ब्रिक्स सदस्य प्रमुख तेल उत्पादक हैं। व्यापारिक मार्गों की नाकेबंदी और तेल की बढ़ती कीमतें इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए सीधा खतरा हैं। भारत इस मंच पर एक “तटस्थ मध्यस्थ” (Neutral Mediator) की भूमिका निभाना चाहता है।

विशेष सत्र (15 मई) के मुख्य विषय:

  1. बहुपक्षीय सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार के लिए दबाव बनाना, जहाँ भारत स्थायी सदस्यता का प्रबल दावेदार है।

  2. ब्रिक्स मुद्रा और स्थानीय व्यापार: अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा, जो रूस और ईरान जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

  3. वैकल्पिक वित्तीय ढांचा: आईएमएफ और विश्व बैंक के विकल्प के रूप में न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को और मजबूत करना।

एक असाधारण कदम के तहत, सभी आगंतुक विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। यह उच्च-स्तरीय जुड़ाव यह स्पष्ट करता है कि भारत के लिए ब्रिक्स 2026 केवल एक बैठक नहीं, बल्कि एक नई और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का घोषणापत्र है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *